प्राण-मन सुला दे ऐसी ताज नहीं चाहिए...एक गीत
प्राण-मन सुला दे ऐसी ताज नहीं चाहिए
दुन्दुभी बजाओ मेरे मीत ओ...ओ...
झूम उठे तान मन, जाग उठे घर-आँगन
छेड़ ऐसे इंकलाब तान ओ ओ ओ.....
गाये चलो ज़िंदगी के गीत ओ...
शोषकों के बाँध का जहर उतारना है तो
बढ़ चलो हथेलियों पे, जान लेके बढ़ चलो
एक दिन हमारी होगी जीत ओ ओ ओ.....
झूम उठे प्राण मन,जाग उठे घरआ
छेड़ ऐसे इंकलाब ...
गाए चलो ज़िंदगी के गीत के गीत ओ.
झूम उठे प्राण मन,जाग उठे घर-आँगन
छेड़ ऐसे इंकलाब ...
