ओस की बूंद सी होती है बेटियां ...
ओस की बूंदों सी होती हैं बेटियां
ज़रा भी दर्द हो तो रोती हैं बेटियां
रोशन करेगा बेटा एक ही कुल को
दो-दो कुलों की लाज ढोती हैं बेटियां .
नहीं कोई दोस्त है एक -दूसरे से कम
हीरा है अगर बेटा तो मोती हैं बेटियां
काँटों की राह पर यह खुद ही चलती रहेंगी
औरों के लिए फूल बोती हैं बेटियां !
विधि का विधान या दुनिया की है ये रश्म
क्यों सबके लिए भार सी होती हैं बेटियां `
कमजोर मानकर न गले से दूर कीजिए
हर वक्त , हर रोज का अरमान हैं बेटियां
धिक्कार है उन्हें जिन्हें बेटी बुरी लगे
माँ -बाप के लिए सरताज होती हैं बेटियां
