दाने धरती है माँ हवन गढ़ के बुईया...गोंडी किसान गीत
मंडला मध्यप्रदेश से धनसिंह परते जी ने यह एक गोंडी गीत गा रहे हैं जो हरियाली त्यौहार में जब गाँव में खेती किसानी शुरू होती है सावन के महीने मेंजब किसान कंधे पर हल रख बैलों के साथ खेत की ओर निकलता है और झमाझम बारिश शुरू होती है उस समय ये गीत गाया जाता है.
दाने धरती है माँ हवन गढ़ के बुईया
सुन्दर बने हे महान ह ह ह
तोर गोदी में सोना चाँदी जुद भे बने माँ
हीरा मोती के खदान हे धरती दाई
मोर भवन गढ़ के बुईया जाँहा हवे माता तौर छैहा
जाँहा खोदो खुटकी छैहा दोह पाके शाबा बाबा तोर बुईया माँ
दाने भन धरती अन के यु पी दैया भरण भरण फल फूल
खिलत है तोर हे गोदी माँ ।
झर झर सावन पानी बारसे तोर गोंदी हरयाली ही ही ही ही
