साजिश तो देखिये जरा...चुनाव पर एक कविता
उनकी गुजारिश तो देखिये जरा
सनकी ख्वाईस तो देखिये जरा
जरा-ए-पेशे को छोड़ चुनाव में
जोर आजमाईश तो देखिये जरा
जिनका आतंक था इलाके भर में
बने अब वारिस तो देखिये जरा
रात का राही उजाले में टहलता
साथ में पुलिस तो देखिये जरा
धुल गए बुरे कर्मों के दाग
अवाम की सिफारिश तो देखिये जरा
राजनीति अपराधी का गठजोड़
लोगो ये साजिश तो देखिये जरा
