सारे अक्षर पढ़ती जा, आगे आगे बढती जा: कोलबहका गीत
राम कैलाश कोल जी बेटियों की शिक्षा पर बघेलखंड के कोल आदिवासियों का परम्परागत कोलबहका गीत सुना रहे हैं। गीत के बोल हैं—सारे अक्षर पढ़ती जा
आगे आगे बढती जा
शहरो में और गाँव में
आजादी की छाँव में
नए इरादे गढ़ती जा। …।
क्यों ज़ुल्मो को सहती है…. ?
