जल रही है जिन्दगी देह की मशाल है...
जल रही है जिन्दगी देह की मशाल है-२,
जल रहा है आदमी साजना लेलाल है|
हो रही गुदाल है जल रही है जिन्दगी
एक दीप बुझ गया, दूसरा खड़ा हुआ,
दूसरे से तीसरा आन पर चढ़ा हुआ
मंजिलो की बुत है हर कदम बढ़ा हुआ
बढ़ रहा है वो जू है बादलों की डाल है;
जल रही है जिन्दगी देह की मशाल है
हर सवाल उठा रहा है अब सवाल किये हुए ,
जिन्दगी तड़प रही है इन्कलाब के लिए,
खून है इसीलिए इसलिए उबाल है
जल रही है जिन्दगी देह की मशाल है
