ग्लोबल गांव : बस कहने भर को दुनिया एक गांव है
बस कहने भर को दुनिया एक गांव है
जहां न कुआं का ठण्डा पानी है
और न ही पीपल का छांव है
बस कहने भर को दुनिया एक गांव है
जहां आदमी का आदमी से रिश्ता गायब है
न ही चौपाल है और न ही कोई ठांव है
बस कहने भर को दुनिया एक गांव है
जहां इधर उधर भटकते लोग हैं
भटकते लोगों के पांव में हाथ और हाथों में पांव है
जहां न रम्भाती गाय और न बैलों की घण्टी है
कुत्ता बने आदमियों के बीच सिर्फ झांव झांव है
जहां न कोयल की कूक, न ही मुर्गे की बांग है
सिर्फ आदमी के बीच कांव कांव है
बस कहने भर को दुनिया एक गांव है
प्रेम प्रकाश
