क्यों समझते हो खुद को कमजोर मज़दूरों, अपनी ताकत पर करो गौर मज़दूरों...
क्यों समझते हो खुद को कमजोर मजदूरों
अपनी ताकत पर करो गौर मजदूरों
दृष्टी में तुम सूर्य की पहली किरण हो
रौशनी का तुम सुनहरा भोर मजदूरों
काम रूपी घंटी का गुल्क हो
विकास रूपी पूजा का तुम ठौर मजदूरों
घर में दर्शन ज्ञानी की उड़ती पतंगे
इन पतंगों की तुम ही डोर मजदूरों
तुम रहो चौकस तो बिल्कुल न बनेगी शोषण भ्रष्ट्राचार के बेड़ियों कौर मजदूरों
राह में ठोकर लगे हिम्मत न हारो फिर करो कोशिश पुरजोर मजदूरों
