आज के नेता
देखो देखो आज के नेताओं का अत्याचार
भीख मांग कर वोटों की हथिया ली सरकार
बस बन गई सरकार तो नहीं कोई जनता की कोई सार समार
चिपके बैठे हैं गद्दी से, नहीं छोडते अपना घर द्वार
गरीब दाने दाने को मोहताज, गोदामों में व्यर्थ सडे अनाज
करते नहीं विचार क्योंकि अगर देश से मिट गई गरीबी
तो कैसे चलेगा इनके गबन कमीशन का व्यापार
याद दिलाए जब कोई इनको इनके वचन या करे बहिष्कार
तो ये उन पर ही छुडवाते आंसू गैस करते लाठीवार
प्रताडित जनता हो मजबूर लाचार जब करे पलटवार
तो ये उन हक मांगने वाले को कहते नक्सलवाद
जब हक मांगने वाला ही इनकी नज़र में नक्सलवाद
तो क्या हम जनता अपने हक के लिए करे नहीं आगाज़
राजनीति बना दी आज के नेताओं ने कत्लगाह
रख दी हम जनता की गर्दन पर महंगाई की तलवार
