मन मारे हैं आन बीराने को...एक बघेलखंडी होली गीत
मन मारे हैं आन बीराने को ....२
चार महिना गरम ऋतु आमै ...२
टप टप चूए पसीना हो ...
पिया आवै तू कौन महीना मे
चार महिना ठंडी ऋतु आमै ....२
थर थर कांपे बदनवा हो भला
थर थर कांपे बदनवा हो ...
चार महिना बारीख ऋतुवा में ...२
थर थर भीगे बदनवा हो भला
