एक रुत आये एक रूत जाए....गीत-
राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गंधर्व एक गीत सुना रहे हैं:
एक रुत आये एक रूत जाए-
मोसम बदले ना बदले ना शरीर-
कब तक सूखे पर्वत आँखे बरस गयी-
बादल तो ना बरसा आँखे बरस गयी-
एक रुत आये एक रूत जाए...
राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से वीरेंद्र गंधर्व एक गीत सुना रहे हैं:
एक रुत आये एक रूत जाए-
मोसम बदले ना बदले ना शरीर-
कब तक सूखे पर्वत आँखे बरस गयी-
बादल तो ना बरसा आँखे बरस गयी-
एक रुत आये एक रूत जाए...