टूट के डाली से हांथो से बिकर जाती हैं...गीत-
जिला-ख़ुशीनगर (उतर प्रदेश) से अंकुर कुमार पाठक गीत सुना रहें हैं-
टूट के डाली से हांथो से बिकर जाती हैं-
ये तो मेहंदी हैं मेहंदी का रंग लाती हैं-
लोग भागो से सहित थोड के ले लातें हैं-
और पत्थर से इसे सौंक से पिसवाते हैं-
ये तो मेहंदी हैं मेहंदी का रंग लाती हैं-
टूट के डाली से हांथो से बिकर जाती हैं...(RM)
