तैहा जिन्दगी के रहत इतरा ले रे बौराले रे पछु पछ्ताबे...छत्तीसगढ़ी गीत-
ग्राम-डोटमा, ब्लाक-जयजयपुर, जिला-जांजगीर चापा (छत्तीसगढ़) से सम्पत लाल यादव एक छत्तीसगढ़ी गीत सुना रहें है:
तैहा जिन्दगी के रहत इतरा ले रे बौराले रे पछु पछ्ताबे-
तैहा मइके के रहत ले इतराले रे पछु पछ्ताबे-
जब हो जही तो गवना फिर परही तोला रोवना-
अब जियत भर तय मछराले रे-
अभी तोला चेत नइ हे घर और द्वार के-
गली-गली घुमत हवस बहाना मार के...(183181) GT
