हुजूर आप का भी एतराम करता चलूं...गज़ल-
जिला-मुंगेर (बिहार) से दीपक कुमार एक गज़ल सुना रहे हैं:
हुजूर आप का भी एतराम करता चलूं-
इधर से गुजरा था तो क्या सलाम करता चलूं-
निगाह दिल की यही आखरी तम्मना है-
तुम्हारे जुल्फ के साये में काम करता चलता चलूं-
हुजूर आप का भी एतराम करता चलूं...(AR)
