राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे...भजन-
विकानेर, राजस्थान से नारायण एक भजन सुना रहें है:
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे-
उसका दुश्नम क्या करता रे जिसका राम रुकना रे-
उसका दुश्मन क्या कर सकता रे जिसका राम रुकना रे-
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे-
हिरणा कुशु पहलाद भगत का ज्ञान दुश्मन बन के-
ज्ञान बन के दुश्मन जन्नदो को सुख में दे दिया-
राम नाम का सुमिरन कर ले फिर प्रेम की माना रे...(182618) GT
