वा झुलनी मा झूल राहों वा झुलनी मा झूल राहों रे-छत्तीसगढ़ी गीत सुना रही है...
जाया मुडा खैरागढ़, जिला-राजनांदगाँव, छत्तीसगढ़ से छतीसगढ़ी गीत सुना रही है-
वा झुलनी मा झूल राहों वा झुलनी मा झूल राहों रे-
गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे-
कौन ने कोडाये तर ओ सगुरिया कौन बाधाये होके पार-
वो झुलनी झूल रहो रे,राम कोडाये ताल हो सगुरिया – लखन बाधाये होक पार या झुलनी मा झूल राहों रे-
गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे-
कौन बनाये अकाल बकल तोरे कौन बनाये-
कौन बनाये गजमोहर ओ झुलनी झूल राहों रे-
सोनारा बनाये अकाल बकल चुरी लोहरा बनाये गजमोहर-
वो झुलनी मा झूल राहों रे,गाय रे गवैया रे वा झुलनी मा झूल राहों रे...
