हो चली है पीर परबत सी पिघलनी चाहिए
हो चली है पीर परबत सी पिघलनी चाहिए
अब हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए
जुर्म की दीवार परदो की तरह हिलने लगी
शर्त लेकिन थी कि बुनियाद हिलनी चाहिए
मेरे सीने में न सही तेरे सीने में सही
आग जो है आग फिर से आग जलनी चाहिए
दुष्यंत कुमार
