"चन्द्रशेखर आजाद" की एक कहानी अपनें लक्ष्य को साध्य कर चलना कभी विचलित न होना...

जिला-राजनांदगाव (छत्तीसगढ़) से वीरेन्द्र गन्धर्व “चन्द्रशेखर आजाद” की एक कहानी तथा प्रसंग सुना रहें है: चंद्रशेखर आजाद देश की आजादी के लिए अपनी भेष बदल-बदल के पुलिस के आखो में धूल झोकता था और अपनी योजना बनाते थे| आजादी के लिये तो एक बार वे हनुमान के पुजारी बन गये और हनुमान के मंदिर में रहते थे और हनुमान के पूजा करते थे और लोगो को देश आजादी के लिये तैयार करते थे| चन्द्रशेखर आजाद मंदिर के बाहर अपने चारपाई में बैठा था एक लड़की मंदिर में आई और चन्द्रशेखर आजाद को उनकी मार्ग से भटकाना चाहती थी| उनकी चारपाई में बैठ गयी, लड़की जवान थी सुन्दर थी किन्तु उन्होंने माँ का दर्जा दिया फिर भी लड़की जो है नही मानी क्योकि लड़की की मन में काम वासना की भावना थी इसलिए अपने चारपाई से उठ गया जिसके पश्चात् उस लड़की को शर्मिंदा होना पड़ा फिर उन्होंने आजाद से माफ़ी मांगी और वह भी देश आजादी के लिए देश भक्ति का योगदान दिया |अपनी लक्ष्य को साध्य कर चलने वाले अपनी मार्ग से विचलित होते है किसी भी पारकर की दुविधा आने बावजूद सुन्दर एंव जवान लड़की देखकर नम को विचलित हो सकतें थे किन्तु इस प्रकार से नही हुआ...

Posted on: Aug 20, 2020. Tags: SONG STORY VICTIMS REGISTER