मदद करना मानव धर्म है...कहानी-
एक समय की बात है, भगवान बुद्ध के कुछ शिष्य भ्रमण के लिये निकले थे उन्होंने देखा कि नदी में एक महिला डूब रही है और बचाव बचाव चिल्ला रही है, शिष्यों ने सोचा यदि हम इसे बचायेंगे तो गुरु के आदेश का उल्लंघन होगा क्योकि वे ब्राम्हण थे और गुरु की आज्ञा है किसी महिला को देखना ही नहीं है लेकिन उसमे से एक शिष्य ने कहा स्त्री हो या पुरुष ये मानव है और मानव धर्म का पालन करना हमारा कर्तव्य है ऐसा सोचकर उसने नदी में छलांग लगा दी और उसे बचा लिया, उसने मदद करते समय उसे एक लकड़ी का गट्ठा समझकर बाहर निकाल दिया, महिला शिष्य को धन्यवाद देकर चली गयी, बाकि शिष्यों ने ये सारी बात गुरूजी को बताई और बताया इसने एक महिला को बचाने के लिये उसे छुवा है, तब गुरु जी बोले दोषी वो नहीं तुम लोग हो, उसने तो मानव धर्म का पालन किया है, स्त्री को लकड़ी की तरह पानी से निकाल दिया और मन से भी निकाल दिया| (AR)
