बुद्धि का उपयोग नहीं करने से इंसान जो मिलने वाला होता है उसे खो देता है...कहानी
एक समय की बात है जब दिल्ली में सिराजुदौला का शासन हुआ करता था, उनके राज्य में एक ब्राम्हण था जो बहुत गरीब था, उसको भीख मिलती नहीं थी तो एक दिन उसकी पत्नी ने कहा सिराजुदौला के दरबार में जाओ और कहना “जिसको न दे मौला उसको दे सिराजुदौला” ब्राम्हण ऐसा ही किया और जाकर राजा के दरबार में बोलने लगा, ये सुनकर राजा बहुत खुस हुये और उसको पास बुलाकर एक तरबूज दे दिया, तो उसने सोचा राजा सोना चांदी देने के जगह ये क्या दे दिया और उसको रास्ते में एक राही को दे दिया और पूछने पर बताया राजा ने दिया है तो राही डर गया और उस तरबूज को दरबार में लेकर दे दिया, राजा ये देखकर बोला मैंने तो ब्राम्हण को मालामाल करने के लिये तरबूज दिया था लेकिन उसने इसकी कीमत नहीं समझी, वास्तव में तरबूज के अंदर हीरे मोती थे, कहानी का तात्पर्य है इंसान कई बार अपनी बुद्धि का उपयोग नहीं करता और जो मिलने वाला होता है उसे खो देता है|
