गौवंश को संरक्षित एवं सुरक्षित रखने के लिए, गौठान सबसे बेहतर उपाय...
ग्राम-केकराखोली, ब्लॉक-मगरलोड, जिला-धमतरी (छत्तीसगढ़) से सुबेलाल व अन्य ग्रामीण गौठान के बारे में जानकारी दे रहे है| एक तरफ़ जहा देश में गोवंश पर मौत का खतरा बना रहता है, वहीं दूसरी तरफ़ ग्रामीण भारत के अधिकतर गाँवों में गौ-ठान की व्यवस्था कई वर्षो से यह परम्परा चली आ रही है. ऐसे ही देश के छत्तीसगढ़ राज्य के छोटे से गाँव केकराखोली में है जो कि गाँव की सार्वजनिक भूमि पर करिबन 3 एकड़ का गौठान है, जहाँ पर पिने के पानी की व्यवस्था भी पंचायत द्वारा की गई है गाँव के सभी लोंगो की मवेशिया रहती है, सुबह 6-7 बजे से दिन के 10 बजे तक एकत्रित होती है, उसके बाद चरवाहा के द्वारा जंगल में चराने के लिए ले जाया जाता है, दिनभर में करिबन 10 किलोमीटर का जंगल भ्रमण कर वापस अपने-अपने घर इससे चरवाहा को रोज़गार भी मिलता है, दूसरा गौवंश संरक्षित एवं सुरक्षित रहती है, ऐसे ही व्यवस्था से गौवंश की रक्षा की जा सकती है.
