कविता : फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना...
ग्राम-मठावन, पंचायत-बागबेड़ा, जिला-नारायणपुर (छत्तीसगढ़) से सामबती दुग्गा उनके साथ शुशीला एक कविता सुना रहीं है:
फूलों से नित हँसना सीखो, भौंरों से नित गाना-
तरु की झुकी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना-
सीख हवा के झोंकों से लो कोमल भाव बहाना-
दूध तथा पानी से सीखो मिलना और मिलाना-
सूरज की किरणों से सीखो जगना और जगाना-
लता और पेड़ों से सीखो सबको गले लगाना-
मछली से सीखो स्वदेश के लिए तड़पकर मरना-
पतझड़ के पेड़ों से सीखो दुख में धीरज धरना-
दीपक से सीखो जितना हो सके अँधेरा हरना-
पृथ्वी से सीखो प्राणी की सच्ची सेवा करना-
जलधारा से सीखो आगे जीवन-पथ में बढ़ना-
और धुँए से सीखो हरदम ऊँचे ही पर चढ़ना...
