हाय हाय रे आजादी चली गई...एक बघेलखंडी आदिवासी गीत
यह गीत निर्मला आदिवासी द्वारा प्रस्तुत है जो की रीवा मध्यप्रदेश से हैं। यह गीत बघेलखंडी भाषा में है, गीत के बारे में प्रस्तावना जगदीश जी के द्वारा दी गई है
पैंसठ बरस बीती आजादी 2
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !
महुवा बीनों, तेंदुपत्ता तोड़ों 2
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !
गाँव-गाँव कंपनिया बन गए 2
आदिवासी की छिनी जमीनें हो ...
आजादी न जानी , हाय हाय रे आजादी न जानी !
पैंसठ बरस बीती आजादी,
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !
चूल्हा पोतों , बर्तन मान्जों 2
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !
रोटी बनाया , चावल बनाई 2
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !
खेत काटी, खलिहान बनाई 2
कबहु न जानी आजादी रे, आजादी चली गई
हाय हाय रे आजादी चली गई !!!!
