क्या सरकार देशी आतंकवादी को दफनाएगी...एक कविता
विदेशी आतंकवादियों को सरकार दफना डाली,
देशी आतंकवादी, जो मेहनतकशों का खून चूस रही
देश की सम्पत्ति को अकेले डकार रही,
मेहनतकशों का सम्पत्ति देश में नहीं
विदेशों में काला धन के रूप में जमा कर रखी ...
मजदूरों का खून चूसने ठेकेदारी लाई,
और श्रम कानून की धज्जियाँ उड़ा रही,
किसान आदिवासियों का जमीन छीन कर नक्सली बता रही
क्या इन आतंकवादियों को सरकार दफनाएगी,
अगर नहीं तो जनता सरकार बन जाएगी
देशी आतंकवादियों को ख़त्म करने जन अदालत में लाएगी
और जनता के सामने फांसी पर लटकाएगी,
तभी देशी आतंकवादी ख़त्म हो पायेगी
ज्योति वर्मा
