हमें घमंड नहीं करना चाहिए और दूसरो की मदद करनी चाहिए...कहानी-
चुरकी और मुरकी दो बहन थी| चुरकी के बच्चे थे और मुरकी के नहीं थे| उनका एक भाई था जो गरीब होने के कारण बहनों को अपने गांव नहीं बुला पता था| चुरकी ने अपने भाई के घर जाने की सोची और बच्चो को बहन के पास छोड़कर चली गई| रास्ते में उसे बेर का एक पेड़ मिला| बेर ने उसे अपने आस पास सफाई करने को कहा चुरकी ने बेर की बात मान कर सफाई की और आगे बढ़ी| आगे एक गाय मिली| उसने मदद मांगी चुरकी ने उसकी भी मदद की| इस तरह रास्ते में मिलने वाले सभी की मदद करते हुए वह गांव पहुंची| भाई-भाभी से मिली कुछ समय बिताया और वापस चली गई| रास्ते में उसने जिनकी मदद की थी| सभी ने उपहार दिये| घर पहुंचने पर मुरकी ने बहन का स्वागत किया| उपहार देखकर उसने भी भाई के घर जाने का मन बनाया| कुछ दिनों बाद वह भाई के घर गई| उसे भी रास्ते में वो सभी मिले और मदद मांगे लेकिन मुरकी स्वभाव से घमंडी थी| उसने किसी की मदद नहीं की| भाई के घर पहुंचकर वह सब से मिली लेकिन उपहार न मिलने पर दुखी थी| वापस आते समय रास्ते में जिन्होंने मदद मांगी थी| मदद न करने के कारण सभी ने उसे बुरा बर्ताव किया| घर पहुंचकर उसने सारा हाल बहन को बताया| तब चुरकी ने कहा तुम सबके सांथ अच्छा व्योहार करती तो ऐसा नहीं होता|
