बघेली कविता : एक बिना हम चले जात रहीं, संग में पकड़े ढर्रा...
तहसील-सिरमोर, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश प्रसाद यादव एक बघेली कविता सुना रहे है. जिसका शिर्षक “आवारा नाती” है:-
एक बिना हम चले जात रहीं, संग में पकड़े ढर्रा-
रही प्यासी ख़ूब दुपहरी, घाम जेठ के कर्रा-
दो नीं से गोहराई ना हमखा, बढ़ गईयाँ बैसाखि-
बैठ रहे चौरा में अपने, पणवत चैन तम्बाखू-
वहीं से बैठे-बैठे, ओखर नाती धूल उड़ावे-
बंद करिन अखबार पढ़ो, लागी वो नाती को हाल सुनावे...
