ममता की खान माता नागिन बन गई है...कविता-
जिला-टीकमगढ़, (मध्यप्रदेश) से दशरथ प्रसाद रजक कविता सुना रहा है:
विनती करूं विधाता क्या भूल मुझ से भई है-
ममता की खान माता नागिन बन गई है-
न चाह न तो मुझको भैया को प्यार देना
जूठन ही बहुत है उस विधि से यही कहना-
फिर भी वो न माना डाक्टर निर्दयी है-
शमशान हर जगह है मंदिर हो या खाई-
सबको मोह लागा माता हो या ताई...
