राजा मानिकचंद्र और उनकी पत्नी की कहानी...
बंगाल के राजा मानिकचंद्र की अनेक रानियां थी, किसी रानी से पुत्र नही हो रहा था फिर उसने यमराज की बहन मुक्ता से विवाह किया लेकिन उससे भी पुत्र नही हुआ, तब उसने उसे घर से निकाल घुडसार में रख दिया और प्रतिदिन आधा किलो चावल देने लगा, मुक्ता उस चावल में से भगवान को भोग लगाती थी, ब्राम्हणों को दान देती थी और बचा हुआ खुद खाती थी, एक दिन उसने एक विश्वासपात्र नौकर से अपने पिता के पास अपना हाल बताने संदेश भेजा, राजा रानी मुक्ता का हाल जानकर दुखी हुवे, और नौकर को धन देकर बोले ये बेटी को महल बनाने के लिए दे देना, फिर वह महल बनवाकर अच्छे से रहने लगी, एक दिन राजा वहां आया तो देखकर अचंभित रह गया, राजा के आने पर उसने स्वागत किया, अच्छा व्यवहार किया, सारी बात राजा के पूछने पर बताई, राजा खुश हुआ और रात वही ठहर गया, सुबह राजधानी आ गया, कुछ दिनों बाद मुक्ता गर्भवती हो गई, राजा उसे महल ले आया और पटरानी बनाया|
