स्वास्थय स्वर : औषधियों का विनाश विहीन विदोहन कर हम प्राकृतिक सम्पदा को बचा सकते हैं-
जिला-टीकमगढ़ (मध्यप्रदेश) से वैद्य राघवेंद सिंह राय संदेश दे रहे हैं कि हमें प्रकृति से प्राप्त औषधियों का ऐसा उपयोग करना चाहिए, जिससे कि औषधीय का मूल भी बचा रहे, और आगे आने वाली पीढ़ी उसका उपयोग कर सके, इसके लिए हमें किसी भी पेड़ पर लगे फलो को पूरा न तोड़के उसमे कुछ फल छोड़ देना चाहिए, जैसे 100 लगे है तो 60 उपयोग करे और 40 छोड़ दें, दूसरा कारण ये है कि जिस तरह इंसान बीमार पड़ते है वैसे ही जानवर भी बीमार पड़ते है, तब हम अपने पालतू पशुओ का ईलाज कर लेते है, लेकिन वन्य जीव जो जंगल में रहते हैं उनके लिए ये बचे फल ही काम आते है, और जिनका उपयोग नही हो पाता वे पौधे बनते जाते हैं, इस तरह से हम विलुप्त होते औषधियों को भी बचा सकते है |
