सूरज तपता धरती जलती, गरम हवा जोरो से चलती...कविता
ग्राम-चैनपुर, जिला-गुमला (झारखण्ड) से राजू राणा एक कविता सुना रहे है:
सूरज तपता धरती जलती गरम हवा जोरो से चलती-
तन से बहुत पसीना बहता, हाथ सभी के पंखा रहता-
आरे बादल काले बादल गर्मी दूर भगा रे बादल-
रिमझिम बूँदें बरसा बादल झमझम पानी बरसा बादल-
लो घनघोर घटाए छाई टप-टप-टप बूँदें आई...
