चीटी ने हाथी से कहा, हाथी दादा जमाना बदल गया है, हाथी ने सूंड उठाकर हामी भरी: कहानी
ग्राम-सिंगपुर, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से ओमकार मरकाम चीटी और हाथी की कहानी सुना रहे है, एक रानी चीटी थी वह रोज भोजन की तलाश में जंगल जाती थी सभी चीटियाँ उस चीटी के साथ जाती | उस जंगल में एक हाथी रहता था| वह दिनभर घूमते रहता था| कभी इस पेड़ को तोड़ता कभी उस पेड़ को तोड़ता, कुछ खाता कुछ फेक देता सूंड में पानी भरता और नहाता दूसरे जानवरों को पानी से भिगोता, जानवरों से धक्का मुक्की भी करता, चीटियों को मसल देता, सभी उससे डरते थे| उससे कोई कुछ न कहता, हाथी से सभी तंग थे | एक दिन की बात है रानी चीटी हाथी से मिली वह बोली तुम दूसरो को सताते हो | यह ठीक नहीं, हाथी बोला चुप रह छोटी से जान बित्ता भर जुबान मेरी मर्जी मैं चाहूँ जो करूँ. रानी चीटी बोली शेर जी कह दूंगी. हाथी हंसकर बोला शेर से क्या कहोगी वह मेरे दम पर मुखिया है| रानी चीटी चुप हो गई वह घास में जाकर छिप गई | हाथी इधर उधर घूम रहा था रानी चीटी चुपके से उसके सूंड में घुस गई | हाथी अपनी मौज में था चीटी सूंड के अन्दर घुसती ही गई| अब रानी चीटी ने हाथी की सूंड को काटना शुरू किया हाथी परेशान होने लगा उसने जोर-जोर से सूंड पटकी फूंक लगाईं कोई जुगत काम न आई रानी चीटी ने काटना बंद नहीं किया | तब रानी चीटी बोली अब आया मजा बच्चू अब क्यूँ रोते हो आई नानी याद? रानी चीटी हाथी को काटती रही. हाथी गिर पड़ा बोला चीटी रानी माफ़ करो-माफ़ करो. अब किसी को नहीं सताऊंगा. किसी को छोटा न मानूंगा रानी चीटी ने सोचा हाथी को अब आई अकल. रानी चीटी सूंड से बाहर आई बोली हाथी दादा, हाथी दादा जमाना बदल गया है हाथी ने सूंड उठाकर हामी भरी | ओमकार मरकाम@9575248234.

