भाव बिना बाजार में, वस्तु मिले नही मोल...श्लोक-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से राजेंद्र गुप्ता अपने जीवन यापन की पद्धति जो पूर्वजो के समय से चली आ रही है, उसे बताते हुए एक श्लोक सुना रहे हैं:
भाव बिना बाजार में, वस्तु मिले नही मोल-
भाव बिना हरी क्यों मिले, भाव सहित हरी बोल-
चिंता से चतुराई घटे और घटे शरीर-
पाप से लक्ष्मी घटे कह गये दास कबीर-
दया धर्म का मूल है और पाप मूल अभिमान-
तुलसी दया न छाडीये जब तक घट में प्राण-
बड़ा हुआ सो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर-
पंछी को छाया नही फल लगे अति दूर-
माया मरी न मन मरा और मर-मर गये शरीर-
आशा तृष्णा न मरी का गये दास कबीर...
