कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे...बघेली लोकगीत
ग्राम, पोस्ट-उलहीखुर्द, जिला-रीवा (मध्यप्रदेश) से रमेश कुमार गुप्ता एक बघेली लोकगीत सुना रहे हैं :
कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे-
मइके के निक लागे भईया भतिजवा-
ससुरे लहुरा देवरवा हो मोही नीके ना लागे-
मइके के नीक लागे घरवा दुवरवा-
ससुरे के कतका महलवा हो मोही नीके ना लागे-
कौने बरन के गजरा हो मोहे नीके ना लागे...
