घर दुवार खार-खार रुख राई डार-डार बगरे है चंदा अंजोर...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-पसेलखार, तहसील-पंडरिया, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से कक्षा 5 के छात्र देवीचंद एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
घर दुवार खार-खार रुख राई डार-डार बगरे है चंदा अंजोर-
तरिया के पार-पार, लईका पारए गोहर-
चंदैनी सुरतावाथे पानी मा पांव बोर, बगरे है चंदा अंजोर-
गीत गवाए लहरा मा, बरस बारी बहरा मा-
लवकुस के अंतल मा लामे हे माया के डोर-
हस-हस के खेलथे पुरवईहा पेलथे रिदमई दास कर तरिहा कहे हिलोर...

