लोमड़ी ने जानवरों को बेवकूफ बनाते हुए जंगल में जोर से चिल्लाकर कहा मै ईश्वर हूँ...कहानी
एक बार एक लोमड़ी गाँव की तरफ़ भागते भागते अचानक एक धोबी के घर में रंगा बर्तन रखा था उसमें कूद पड़ा, लोमड़ी रात भर वहा रहने के बाद बाहर निकलकर जंगल की ओर निकला तब उसने नदी किनारे देखा कि उसका रंग नीला पड़ गया है, तो उसने सोचा मै अब जानवरों को बेवकूफ बना सकता हूँ| वह जंगल में जाकर जोर से चिल्लाने लगा, मै भगवान हूँ, मुझे ईश्वर ने भेजा है सभी जानवर डर के मारे उसके करीब आ जाते है. और उसको सचमुच का भगवान मान लेते है और वह राजा बन बैठा| धीरे-धीरे एक बार उसी के बिरादरी के कुछ लोमड़ी दूर से आवाज़ लगाने लगे वह अपनी आवाज़ को रोक ना सका और अपनी भाषा में ऊआ, ऊआ करने लगा तब सभी ने सोचा यह तो रंग में रंगा एक लोमड़ी (सियार) है. तब सभी ने मिलकर उसकी पिटाई कर दी. इससे यह शिक्षा मिलती है कि किसी को बेवकूफ नहीं बनाना चाहिए.
