सपनें दिखाने वालों, कहीं भूल ना जाना, सपनों के संसार में, कहीं ख़ुद ना खो जाना...कविता
तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पड़ीयारी एक कविता सुना रहे है:
सपनें दिखाने वालों, कहीं भूल ना जाना-
सपनों के संसार में, कहीं ख़ुद ना खो जाना-
तुम भी मुसाफ़िर हो, हम भी मुसाफ़िर है-
एक दिन सभी को, यहाँ से तो जाना है-
तुम्हारे लिए कफ़न, हमारे लिए भी कफ़न-
लकड़ी के घोड़े पर चढ़कर, ख़ाक हो जाना है-
बनाया महल अटारी, धरा का धरा रह जायेगा...
