जाति हमर गोंड, जनसंख्या कई करोड़, मन्द तेला छोड़, मगर गोंडी धर्म ला झन छोड़...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-चाह्चढ़, विकासखण्ड-दुर्गुकोंदल, जिला-कांकेर, उत्तर बस्तर (छत्तीसगढ़) से रमेश दुग्गा छत्तीसगढ़ी में एक कविता सुना रहे है:
जाति हमर गोंड, जनसंख्या कई करोड़-
मन्द तेला छोड़, मगर गोंडी धर्म ला झन छोड़-
हमर बुढा देवता है, जात है जिन्हें न्योता है-
गाँव में शितला माँता है, मुखिया गाँव गायता है-
गोंडी हमर बोली है, आधी अंत की जोड़ी है-
मंदर में शखरी है, जेकर साथ कड़ी है,भीतर में डोकरा खाड़ी है-
मन में ठान लेवन हम, गोंडी हमर धर्म, और चलन बुढा देव के चरण...
