वोट हमारा, राज तुम्हारा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा...कविता
भोरमदेव वनांचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक कविता सुना रहे है:
वोट हमारा राज तुम्हारा, नहीं चलेगा, नहीं चलेगा-
कितना संघर्ष से जी रहे है हम, कहा भी नहीं जा सकता गरीबोँ को-
सपना कब साकार होगा, लुन की लकड़ी की चिंता-
सात किलो चावल से, बच्चों की भूख नहीं मिटती-
छत्तीसगढ़ की पहचान, नागर बैल और किसान-
ऐसा है छत्तीसगढ़ के शासन, गरीब, मजदूर, किसान को कितना तड़पाती है...
