कुरु-कुरु करत आबे रे मईना-शुरू-शुरू मा खाबे रे...छत्तीसगढ़ी कविता
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैया लाल पडियारी एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
कुरु-कुरु करत आबे रे मईना-शुरू-शुरू मा खाबे रे-
फरे हावे पीपर डारी मा, पीपर पाके हावे न रे मईना-
बैईठ के मजा ले डाही मा, पका-पका ला खाबे रे मईना-
चीं, चां, चूं, चूं झनी करबे रे मईना, लगे हवय रे फांदा-
कले चुप बैईठे रहिबे कोन्हो न कोंहा मा बईठे रहिबे जादा...
