40 वर्षो में बढ़ी महंगाई का असर: ग्रामीण भारत पहले से अब कम भोजन कर पा रहा, कुपोषित है...
40 सालों में बढ़ी महंगाई का ग्रामीण आहार पर बहुत बुरा असर पड़ा है, नेशनल न्यूट्रीशन मॉनीट्रिंग ब्यूरो के सर्वे के अनुसार देश की करीब 70% आबादी यानी 84 करोड़ लोगों को जितना भोजन जरुरी है उपलब्ध ही नही है, 3 साल से कम उम्र बच्चों को 300 मिलीलीटर दूध रोजाना की ज़रूरी है जो सिर्फ 80 मिलीलीटर ही उपलब्ध है। गाँव में 35% पुरुष और महिलाएं कमजोर हैं 42% बच्चे कुपोषित हैं। आजीविका ब्यूरो नाम की संस्था ने गरीबी रेखा से नीचे की 500 महिलाओं पर सर्वे किया, जिससे सामने आया है, भोजन में सब्जी, फल, अंडा जैसे पोषण युक्त भोजन लगभग गायब ही हो गया है। हर तीन में से एक महिला के बच्चे कुपोषण के शिकार थे। 2015 में वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट के अनुसार न्यूट्रीशन की कमी का भारत की अर्थव्यवस्था पर काफी बुरा असर पड़ने वाला है। इससे सरकार की मेक इन इंडिया और स्किल इंडिया योजना प्रभावित होंगे। भारत में कुपोषित बच्चों की बड़ी आबादी है, ब्राजील और चीन दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं।
