सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी...कविता
जिला डिंडोरी मध्यप्रदेश से संतोष कुमार अहिरवार एक कविता सुना रहे हैं :
सिंहासन हिल उठे राजवंशों ने भृकुटी तानी थी – बूढ़े भारत में आई फिर से नयी जवानी थी – गुमी हुई आज़ादी की कीमत सबने पहचानी थी – दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी – चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी – बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी – खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी...
