नदी नाला की उफान, बाग़ बगीचों की मुस्कान...कविता-
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी एक कविता सुना रहे है:
नदी नाला की उफान बाग़ बगीचों की मुस्कान-
था हरा भरा खेत खलिहान-
अब लगता है सुना शमशान-
नदी नाला में तो अब मगरमच्छ दिखता ही नहीं-
पर गाँव शहर में मगरमच्छ की कमी नहीं-
एक ढूंढो तो सैकड़ो मिल जाते है-
सच्चाई कहो तो मारने दौड़ जाते है...
