बेटी को जग में आने दो, फूलों सी महकने दो...बेटियों पर कविता -
ग्राम-तमनार, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से कन्हैयालाल पडियारी बेटियों पर आधारित एक कविता सुना रहे हैं:
जुल्फे बिखरा कर चला ना करो, बरसात हो जायेगी-
अकड़कर चला न करो, ठोकर लग जायेगी-
बेटी को जग में आने दो फूलों सी महकने दो-
बेटी को चाँद सितारों सी चमकने दो-
बेटी को स्कूल जाने दो-
बेटी डॉक्टर वकील हो सकती है-
बेटी समाज सेविका हो सकती है-
बेटी मायके का बेटा हो सकती है-
ससुराल वालों का चहेता हो सकती है-
बेटी को जीने दो...
