वनांचल स्वर : कौउहा और मदुरा के छाल के रस से घाव का इलाज -
सीजीनेट जन पत्रकारिता जागरूकता यात्रा आज ग्राम-हटका चारामा, ब्लाक-नरहरपुर, जिला-उत्तर बस्तर कांकेर (छत्तीसगढ़) में पहुँची है वहां बाबूलाल नेटी की मुलाक़ात गांव के वैद्य से हुई है मनसा जी बता उन्हें रहे हैं किसी हथियार जैसे टंगिया या बसूला जिसका गाँव के लोग रोज़ अपने काम के लिए उपयोग करते हैं उससे कट जाने पर या किसी से भी चोट लगने पर कउहा की छाली या मदुरा की छाली को कुचल कर उसके रस को घाव पर 4 दिन तक लगातार लगाने से घाव ठीक हो सकता है, इसके लिए किसी दवाई की ज़रुरत नहीं है. इस तरह से वे बता रहे हैं कि वनो में निवास करने वाले आदिवासी अलग-अलग तरीके से वन की मदद से ही अपना इलाज करते आ रहे हैं |

