अगर पेड़ भी चलते होते कितने मजे हमारे होते...बाल कविता
ग्राम-तेलम्मा, पंचायत-भेजा, जिला-उत्तर बस्तर, कांकेर (छत्तीसगढ़) से नरोत्तम नुरेटी, ऋचा नेताम और शैलेन्द्र कुमार यादव एक कविता सुना रहे हैं :
अगर पेड़ भी चलते होते कितने मजे हमारे होते – बांध तने ने उसकी रस्सी जहाँ कहीं भी हम चल जाते – अगर अचानक धूप सताती उसके नीचे हम छिप जाते – अगर अचानक भूख सताती तोड़ मधुर फल उसके खाते – अगर अचानक बाढ़ कहीं तो कीचड आती झट ऊपर हम चढ़ जाते...
