प्यास लगी थी गजब की मगर पानी में जहर था...कविता -
ग्राम-छुल्कारी, पोस्ट-फुन्गा, जिला-अनुपपुर (मध्यप्रदेश) से रेवालाल केवट कुछ पंक्तियाँ सुना रहे है:
क्या खूब लिखा है किसी ने-
प्यास लगी थी गजब की मगर पानी में जहर था-
पीते तो मर जाते और न पीते तो भी मर जाते-
बस यही दो मसले जिन्दगी भर न हल नहीं हुए-
न नींद पूरे हुए न ख्वाब मुकमल हुए-
वक्त ने कहा काश थोडा और सब्र होता-
सब्र ने कहा काश थोडा और वक्त होता-
सुबह-सुबह उठना पड़ता है कमाने के लिए साहब-
आराम कमाने के लिए निकलता हूँ आराम छोडकर-
न हुनर सडको पर तमाशा करता है-
और किस्मत महलो में राज करती है...
