हांथी दादा बड़े सवेरे निकल पड़े मैदान में...बाल कविता -
तमनार पड़ेगांव, जिला-रायगढ़ (छत्तीसगढ़) से डॉ PS पुष्प बाल कविता सुना रहे हैं:
हांथी दादा बड़े सवेरे निकल पड़े मैदान में-
कांप रहे थे ठुठरन में जान नही रही जान में-
इतने में तो सूरज भईया निकल पड़े असमान से-
टाटा कह जाड़े को दादा उछल पड़े अब शान से-
टाटा कह जाड़े को दादा उछल पड़े अब शान से...
