छत्तीसगढ़ के एक पहचान, गाँव गरीब अउ किसान...छत्तीसगढ़ी कविता -
आदिवासी बहुल क्षेत्र भोरमदेव वनांचल, जिला-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) से अमित साहू एक छत्तीसगढ़ी कविता सुना रहे हैं :
छत्तीसगढ़ के एक पहचान गाँव गरीब अउ किसान – हांथ में धरे हंसिया डोरी मुड़ मा बांधे पागा – कान खोचे चोंगी भईया ले ला चले धान – होत बिहनियां बहुरिया बासी धर के आवत है – जावत है ले ला सोनहा बाली धान – गाँव गरीब अउ किसान के मोदी है सरकार...
