कच्ची कोमल कली बेटियां, लगती कितनी भली बेटियां...बेटियों पर कविता
ग्राम-छुल्कारी, जिला-अनुपपुर (म.प्र.) से मन्दाकिनी मिश्रा बेटियों पर एक कविता सुना रही है:
कच्ची कोमल कली बेटियां, लगती कितनी भली बेटियां-
मत बांधो पैरो पे घुंघरु आरक्षित को चली बेटियां-
कितने भी लह्लाओ बेटो को लेकिन बढ़ जाती है बेटियां-
साहब मिनिस्टर प्रिंसिपल आज बनकर दिखाती है बेटियां-
मुरझाकर फेक दिए जाते है बगियो में-
फिर भी डाली डाली लगी बेटियां-
मत बांधो पैरो पे बंधन आरक्षित को चली बेटियां...
