न छुरी रखता हूँ न पिस्तौल रखता हूँ...बस्तर की कविता-
ग्राम-गामावाडा, जिला-दंतेवाडा (छत्तीसगढ़) से सोनार कुमार भास्कर बस्तर के ऊपर आधारित एक कविता सुना रहे है:
न छुरी रखता हूँ न पिस्तौल रखता हूँ-
बस्तर का एक बेटा हूँ दिल में जिगर रखता हूँ-
इसलिए हमेशा अकेले ही निकलता हूँ-
बंगले गाड़ी तो बस्तर के घर-घर की कहानी है-
तभी तो सारी दुनिया बस्तर की दीवानी है-
अरे मिट गए बस्तर को मिटाने वाले-
क्योंकि आगे तपती बस्तर की जवानी है-
ये आवाज नहीं ये शेर की दाहाड़ है-
हम तो पहाड़ है इसलिए इतिहास के वो सुनेहरा पत्ते है-
जो भगवान् ने ही चुने है-
दिलदार और दमदार है बस्तर-
रणभूमि में तेज तलवार है बस्तर-
पता नहीं कितनो की जान है बस्तर-
सच्चे प्यार पर कुर्बान है बस्तर-
यारी करे तो यारो के यार है बस्तर-
तभी तो दुनिया कहती है-
बाप रे खतरनाक है बस्तर-
शेरो के बच्चे शेर ही जाने जाते है-
लाखो के बीच बस्तरवासी ही पहचान बने जाते है...
